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डायबिटीज कंट्रोल करने और इसके मैनेजमेंट के लिए एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. भावना अत्री दे रही हैं 18 सवालों के जवाब

मौसम में बदलाव के साथ शारीरिक गतिविधि के स्तर, खान-पान की आदतों में बदलाव होता है जो रक्त शर्करा नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। मौसम के बदलाव से ब्लड शुगर पर असर पड़ता है। इसके अनुसार जीवनशैली में बदलाव जरूरी हैं।
Updated On: 6 Dec 2024, 10:21 am IST
ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपने आहार में करें ये बदलाव। चित्र : अडोबेस्टॉक

अंदर क्या है

  • डायबिटीज का जोखिम 
  • डायबिटीज के कारण 
  • डायबिटीज के स्वास्थ्य जोखिम 
  • डायबिटीज कैसे मैनेज करें 
  • डायबिटीज कंट्रोल करने वाले फूड्स 
  • डायबिटीज के लिए एक्सरसाइज
  • डायबिटीज के लिए इमरजेंसी किट 
  • बदलते मौसम में डायबिटीज मैनेजमेंज के उपाय

डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज हैं और भारत में इसके आंकड़ें इतने ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं कि भारत को डायबिटीज कैपिटल कहा जाने लगा है। बुजुर्ग ही नहीं अब युवा और छोटे बच्चे भी इसके शिकार होने लगे हैं। उस पर घरेलू नुस्खों के नाम पर तरह-तरह के उपचार थोपे जा रहे हैं। जो सभी बड़े-बड़े दावे करते हैं। आखिर कैसे किया जाना चाहिए डायबिटीज का प्रबंधन (Diabetes management), इससे जुड़े 18 सवालों के जवाब दे रही हैं डॉ भावना अत्री। डॉ भावना सर्वाेदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद में कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजी हैं।

1 डायबिटीज के सामान्य लक्षण क्या हैं? और इनसे समय रहते कैसे बचा जा सकता है?

कई वर्षों तक डायबिटीज का निदान नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसके शुरू में कोई लक्षण नहीं होंते। यदि रक्त ग्लूकोज का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो अच्छी भूख के बावजूद रोगी का वजन कम होना शुरू हो जाता है, पेशाब की आवृत्ति बढ़ जाती है, प्यास बढ़ जाती है, घाव नहीं भरते, पैरों में असामान्य अनुभूति होती है। नियमित रूप से ब्लड ग्लूकोज की जांच करके इन लक्षणों को रोका जा सकता है।

2  भारत को डायबिटीज कैपिटल कहा जाने लगा है, और संस्थाएं एवं सरकारें इसके लिए गंभीर रूप से चिंतित हैं, इसकी वजह क्या है?

शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव के कारण और मोटापा बढ़ने के कारण भारत डायबिटीज की राजधानी बन गया है। भारत में मोटापे और डायबिटीज की दर बढ़ने का कारण लोगों की जीवनशैली है। लोग अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का सेवन करते हैं और लोगों में तनाव का स्तर बढ़ता जा रहा हैं। तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण लोग अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं, जिससे मोटापे में वृद्धि हो रही है और इसके परिणामस्वरूप डायबिटीज के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है।

3 डायबिटीज मैनेजमेंट (Diabetes management) के लिए किस तरह के आहार का सेवन करना चाहिए?

डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए रोगी को अपने खाने के समय को ठीक करना चाहिए और अनुपात को भी ठीक करना चाहिए। डायबिटीज प्रबंधन (Diabetes management) में सहायक कुछ प्रमुख आहार पोषक तत्व हैं:

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए आहार में कार्ब्स की मात्रा को कम करना सबसे ज्यादा जरूरी है। चित्र : अडॉबीस्टॉक

प्रोटीन: यह ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है।
फाइबर: यह शुगर के अवशोषण को नियंत्रित करता है और ब्लड शुगर की वृद्धि को रोकता है।
गुड फैट: स्वस्थ वसा इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं।
मैग्नीशियम: यह रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और इंसुलिन की प्रभावशीलता को बढ़ाने में सहायक है।
ओमेगा-3 फैटी एसिड: यह सूजन को कम करता है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है।
इन पोषक तत्वों को आहार में शामिल करने से ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

4 डायबिटीज में अकसर इंसुलिन और अन्य दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। इनका उपयोग कैसे और कब बदलना चाहिए, खासकर तब जब शुगर लेवल अचानक बढ़ या घट जाए?

यदि रक्त शर्करा अनियंत्रित हो, रोगी हाइपोग्लाइसेमिक एपिसोड का अनुभव कर रहा है, रोगी में कोई और बीमारी या जटिलताएं विकसित हो गई हैं, तो उपचार को बदलने की आवश्यकता है।
डायबिटीज की दवा का उपयोग और समायोजन डॉक्टर के मार्गदर्शन में होना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग ज़रूरतें होती हैं।

5 जब ब्लड शुगर का लेवल अचानक बढ़ जाए या घट जाए तब क्या करना चाहिए?

जब रक्त शर्करा का स्तर अचानक बढ़ जाए, तो आहार की निगरानी करें, इंसुलिन की खुराक को समायोजित करें और आपातकालीन इंसुलिन खुराक पर विचार करें। यदि रक्त शर्करा का स्तर गिरता है, तो भोजन ठीक समय से लें, इंसुलिन की खुराक कम करें, और त्वरित कार्बोहाइड्रेट के साथ लो ब्लड शुगर लेवल का इलाज करें। ब्लड शुगर लेवल में परिवर्तन का पता लगाने के लिए नियमित ब्लड शुगर निगरानी, ​​जैसे बार-बार जांच और निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग आवश्यक है।

6 आयुर्वेद , कटहल के बीज, करेला जैसी बहुत सारी होम रेमेडीज के बारे में कहा जाता है कि ये डायबिटीज कंट्रोल (Diabetes management) कर सकती हैं। इनमें कितनी सच्चाई है या ये सब कितनी प्रभावशाली हैं?

ये उपचार पारंपरिक प्रथाओं में लोकप्रिय हैं, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में उनकी प्रभावकारिता का समर्थन करने के लिए वर्तमान में मजबूत वैज्ञानिक डेटा की कमी है।
हालांकि ऐसे खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार में शामिल करने से स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं, लेकिन डायबिटीज प्रबंधन के लिए केवल उन पर निर्भर रहना वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा समर्थित नहीं है।

करेला और कटहल जैसे सुपरफूड्स को आहार में शामिल किया जा सकता है। चित्र- अडोबीस्टॉक

प्रभावी डायबिटीज प्रबंधन के लिए रोगियों के लिए एविडेंस बेस्ड ट्रीटमेंट और जीवनशैली में संशोधन का पालन करना महत्वपूर्ण है। इन्हें डॉक्टर की सलाह से मौजूदा उपचार के साथ ही जोड़ा जाना चाहिए।

7 क्या तनाव और नींद की कमी का ब्लड शुगर पर प्रभाव होता है, और इसे कम करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं? 

जी हां तनाव का संबंध कमजोर रक्त ग्लूकोज नियंत्रण से है। वास्तव में मनोवैज्ञानिक मुद्दों जैसे अवसाद का होना डायबिटीज के साथ आम है। ध्यान, योग, नियमित शारीरिक व्यायाम तनाव के स्तर को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। परिवार का निरंतर सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

8 डायबिटीज के मरीज को फिजिकल एक्टिविटी में कितनी विविधता (जैसे योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो) लानी चाहिए? कौन से एक्सरसाइज ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सबसे अधिक सहायक हैं?

डायबिटीज के मरीजों को फिजिकल एक्टिविटी में विविधता लाना आवश्यक है, क्योंकि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। कम से कम 150 मिनट प्रति सप्ताह की शारीरिक गतिविधि की अनुशंसा की जाती है, जो सप्ताह में कम से कम 5 दिनों तक की जाए।

इसमें एरोबिक और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग दोनों को शामिल करना आवश्यक है। बुजुर्ग रोगियों को विशेष रूप से संतुलन व्यायाम पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि उनकी शारीरिक स्थिरता और गिरने के जोखिम को कम किया जा सके।

9 डायबिटीज के कारण शरीर के किस हिस्से में अधिक समस्या आ सकती है, और इन हिस्सों का ध्यान कैसे रखें?

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर के स्तर के कारण सभी प्रमुख अंग प्रणालियों में जटिलताएं पैदा कर सकती है। इन जटिलताओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी, समय से पहले मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, किडनी नेफ्रोपैथी, कार्डियोवस्कुलर सिस्टम, स्ट्रोक, परिधीय न्यूरोपैथी और ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी शामिल हैं।

डायबिटिक रेटिनोपैथी से आंखें प्रभावित होती हैं, जिससे तरल पदार्थ का रिसाव, सूजन और दृष्टि हानि हो सकती है। गुर्दे डायबिटीज संबंधी नेफ्रोपैथी से पीड़ित होते हैं, जिससे अंतिम चरण की गुर्दे की बीमारी (ESRD) हो सकती है और डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।

त्वरित एथेरोस्क्लेरोसिस और हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण हृदय प्रणाली में दिल के दौरे और दिल की विफलता का खतरा अधिक होता है। इस्केमिक स्ट्रोक और रक्तस्रावी स्ट्रोक के कारण भी स्ट्रोक की संभावना अधिक होती है।

10 डायबिटीज की जटिलताओं को पहचानने और समय रहते रोकने के लिए किस तरह के टेस्ट की सलाह दी जाती है?

डायबिटीज की जटिलताओं को पहचानने और रोकने के लिए नियमित परीक्षण और समय पर चेकअप बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन जटिलताओं का शीघ्र पता लगाने से उपचार को प्रभावी बनाना संभव होता है और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है।

डायबिटीज आपकी आंखों की रोशनी भी छीन सकती है। चित्र: शटरस्‍टॉक

आंखें- साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं
किडनी- मूत्र और रक्त परीक्षण
नियमित बीपी, लिपिड परीक्षण
न्यूरोपैथी के संबंध में नियमित इतिहास लेना।

यदि न्यूरोपैथी मौजूद है तो पैर के अल्सर या घाव को रोकने के लिए पैरों की देखभाल महत्वपूर्ण है।
यदि कोई लक्षण हृदय संबंधी समस्या का संकेत देता है तो व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता है
इसलिए इतिहास, परीक्षा और परीक्षण नियमित रूप से किया जाता है।

11 डायबिटीज के मरीजों के लिए अगर किसी इमरजेंसी किट की बात करें, तो उसमें क्या-क्या होना चाहिए?

हां, डायबिटीज रोगी और इसके परिवार के सदस्यों को हाइपोग्लाइसीमिया का प्रबंधन करना आना चाहिए । उन्हें आपातकालीन किट में ग्लूकोज टैबलेट या ग्लूकोन डी रखना चाहिए। गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के इतिहास वाले कुछ लोग ग्लूकागन इंजेक्शन रख सकते हैं।

12 डायबिटीज के कारण अक्सर पैरों में सेंसेशन या दर्द का सामना करना पड़ सकता है। इस सबको कैसे मैनेज किया जा सकता है? 

डायबिटीज के रोगियों में असामान्य संवेदनाएं न्यूरोपैथी, मनोवैज्ञानिक तनाव और अनियंत्रित रक्त ग्लूकोज आदि के कारण होती हैं। समय के साथ यदि रक्त ग्लूकोज और अन्य मेटाबॉलिक मापदंडों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समय के साथ खराब हो जाएगा। विटामिन बी12, थायराइड और पोषण संबंधी कमियों को ठीक किया जाना चाहिए।

13 क्या बदलते मौसम का डायबिटीज पर असर होता है? ठंड या गर्मी में ब्लड शुगर के स्तर में बदलाव कैसे होता है और इसके अनुसार जीवनशैली में क्या बदलाव करें?

हां, मौसम में बदलाव के साथ शारीरिक गतिविधि के स्तर, खान-पान की आदतों में बदलाव होता है जो रक्त शर्करा नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। मौसम के बदलाव से ब्लड शुगर पर असर पड़ता है। इसके अनुसार जीवनशैली में बदलाव जरूरी हैं। गर्मी और सर्दी दोनों में शरीर की अलग-अलग जरूरतें होती हैं, और इन्हें ध्यान में रखते हुए उचित आहार, व्यायाम और हाइड्रेशन बनाए रखना चाहिए।

14 भविष्य में डायबिटीज से संबंधित संभावित इलाज के बारे में क्या नए शोध हो रहे हैं, और वे मरीजों के लिए क्या उम्मीदें दे सकते हैं?

इंसुलिन इन्फ्यूजन पंप विशेष रूप से DM1 रोगियों के लिए अधिक से अधिक स्वीकार्य होते जा रहे हैं। ऐसी दवाओं का विकास जो वास्तव में वजन कम कर सकती हैं, सीवी मृत्यु दर (ल्यूक जीएलपीआरए) को कम कर सकती हैं और कृत्रिम अग्न्याशय का विकास कर सकती हैं अभी भी प्रक्रिया में है।

15 डायबिटीज में हार्मोनल असंतुलन का क्या प्रभाव पड़ता है और कैसे इसे संतुलित रखा जा सकता है? विशेषकर महिलाओं के लिए यह कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है?

अनियंत्रित डायबिटीज पुरुष और महिला दोनों में हाइपोगोनाडिज्म और बांझपन का कारण बन सकता है। इससे पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है। महिलाओं में, विशेषकर गर्भावस्था, मेनोपॉज़ और पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) जैसी स्थितियों में हार्मोनल असंतुलन का असर डायबिटीज पर अधिक पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान गर्भावधि डायबिटीज यानी जेस्टेशनल डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है, और पीसीओएस में इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है।

16 डायबिटीज के मरीज को यात्रा या ट्रैवल के दौरान किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि भोजन, दवाइयाँ, या आराम का समय?

  1. उन्हें समय पर भोजन करना चाहिए, अन्यथा हाइपोग्लाइसीमिया की संभावना रहती है
  2. स्वस्थ भोजन खाने का प्रयास करें
  3. समय पर सोएं
  4. हाइपोग्लाइसीमिया होने पर उसे ठीक करने के लिए ग्लूकोज की गोलियां या ग्लूकोन अपने साथ रखें
  5. यदि वे इंसुलिन का उपयोग करते हैं तो उन्हें उचित रूप से इंसुलिन को उचित तापमान में) रखना चाहिए।
कुछ बातों का ध्यान रखें तो डायबिटीज के मरीज भी अपने फैमिली और दोस्तों के साथ बाहर डाइनिंग के लिए जा सकते हैं। चित्र : अडॉबीस्टॉक

17 क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए डिजिटल उपकरण (जैसे ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग ऐप्स) उपयोगी हैं और कौन-कौन से टूल्स ब्लड शुगर के प्रबंधन को आसान बना सकते हैं?

हमारे पास ग्लूकोमीटर जैसे ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण हैं। इसके अलावा हमारे पास निरंतर ग्लूकोज मॉनिटर है जो त्वचा पर लगाया जाता है और रक्त ग्लूकोज स्तर जानने में मदद करता है। लेकिन डॉक्टरों की मदद से इनकी सावधानीपूर्वक व्याख्या की जानी चाहिए।

18 अकसर डायबिटीज रोगियों में हाई बीपी और हृदय रोगों का जोखिम देखा गया है, क्या इनका वाकई कोई संबंध है?

डायबिटीज से दिल का दौरा पड़ सकता है, स्ट्रोक, गुर्दे की विफलता आदि हो सकता है। रक्त ग्लूकोज नियंत्रण, वजन नियंत्रण, बीपी नियंत्रण, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण, धूम्रपान बंद करना, तनाव कम करना सभी डायबिटीज के प्रबंधन में मदद करते हैं। साथ ही जटिलताओं के लिए नियमित परीक्षण से डायबिटीज का निदान होने की संभावना कम हो सकती है। इसलिए, नियमित अनुवर्ती कार्रवाई और परीक्षण महत्वपूर्ण है।

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लेखक के बारे में
योगिता यादव

योगिता यादव एक अनुभवी पत्रकार, संपादक और लेखिका हैं, जो पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से हिंदी मीडिया जगत में सक्रिय हैं। फिलहाल वे हेल्थ शॉट्स हिंदी की कंटेंट हेड हैं, जहां वे महिलाओं के स्वास्थ्य, जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी सामग्री का संयोजन और निर्माण करती हैं। योगिता ने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, जी मीडिया और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है। वे 'हेल्दी ज़िंदगी' नाम का उनका हेल्थ पॉडकास्ट खासा लोकप्रिय है, जिसमें वे विशेषज्ञ डॉक्टरों और वेलनेस एक्सपर्ट्स से संवाद करती हैं।

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