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Nervous breakdown : खतरनाक हो सकता है इसे हल्के में लेना, जानिए इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए

नर्वस ब्रेकडाउन को मेंटल हेल्थ क्राइसिस के रूप में भी जाना जाता है। इसमें व्यक्ति किन्हीं कारणों से धीरे धीरे एंग्ज़ाइटी का शिकार होने लगता है, जो व्यक्ति की मेंटल हेल्थ और रोजमर्रा के कार्यों को प्रभावित करता है।
Published On: 29 Apr 2024, 07:00 pm IST
नर्वस ब्रेकडाउन होने पर दिल की धड़कन तेज हो सकती है। बेहोशी, चक्कर आना या हल्का महसूस होना हो सकता है। चित्र: शटरस्टॉक

व्यक्ति को जीवन में कई कारणों से तनाव का सामना करना पड़ता है। इसका असर व्यक्ति की मेंटल हेल्थ पर दिखने लगता है। बार बार किसी एक ही बात पर विचार करना और मन ही मन मन के असंतुलन के साथ जंग लड़ना देखते ही देखते नर्वस ब्रेकडाउन का कारण बनने लगता है। मन की इस लड़ाई में व्यक्ति अक्सर एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है, जिससे इस समस्या का सामना करना पड़ता है। जानते हैं नर्वस ब्रेकडाउन क्या है और इस समस्या से कैसे डील करें।

नर्वस ब्रेकडाउन किसे कहते हैं

मनोचिकित्सक डॉ युवराज पंत बताते हैं कि वे लोग जो लंबे वक्त तक तनाव या चिंता से ग्रस्त रहते हैं, वे अधिकतर पेनिक अटैक या नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार होते हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति जो नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार होता है, वो कम से कम 15 मिनट से लेकर 1 से 2 घंटे तक घबराहट, पसीना आना, तेज़ धड़कन और कुछ देर तक बेहोशी का शिकार रहता है। कुछ मामलों में व्यक्ति कुछ महीनों तक नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार रहता है।

नर्वस ब्रेकडाउन को मेंटल हेल्थ क्राइसिस के रूप में भी जाना जाता है। इसमें व्यक्ति किन्हीं कारणों से धीरे धीरे एंग्ज़ाइटी का शिकार होने लगता है, जो व्यक्ति की मेंटल हेल्थ और रोजमर्रा के कार्यों को प्रभावित करता है। इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता दिनों दिन कम होने लगती है और वो हर पल गुमसुम रहने लगता है।

किसी भी समस्या को हल करने के लिए पहले अपनी चिंता और तनाव के कारणों का आंकलन करें।। चित्र: शटरस्टॉक

जानते हैं नर्वस ब्रेकडाउन के लक्षण

सांसों का तेज़ गति से चलना
आत्म हत्या का ख्याल बार बार मन में उठना
अति गंभीर अवस्था में मिर्गी जैसे दौरे पड़ना
बेहोशी की अवस्था में पहुंच जाना
तेज़ सिरदर्द और चक्कर आना
छाती में भारीपन महसूस होना
घबराहट होना और खूब पसीना आना
एपिटाइट में बदलाव का आना। कुछ लोगों में भूख कम होने लगती है और कुछ लोगों में भूख बढ़ जाती है

जानें किस प्रकार नर्वस ब्रेकडाउन से डील करें।

1. तनाव के कारणों को पहचानें

किसी भी समस्या को हल करने के लिए पहले अपनी चिंता और तनाव के कारणों का आंकलन करें। इससे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके गंभीर प्रभाव से बचने में मदद मिलती है। धैर्य से किसी भी समस्या को हल करने की ओर बढ़े और आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग सेंशन भी लें।

2. मेडिटेशन और रिलेक्सेशन की मदद लें

मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए दिन की शुरूआत मेडिटेशन से करें। इससे मेंटल प्रेशर से बचा जा सकता है। कुछ देर ध्यान और मेडिटेशन करने से मन में उठने वाले विचारों को रिलीज़ करने में मदद मिलती है और जीवन में सकारात्मकता को बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. अपनी खुशी का ख्याल रखें

अन्य लोगों के अनुसार जीने और उनके मुताबिक चलने की जगह जीवन में अपनी खुशियों की ओर ध्यान केंद्रित करें। इससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है और सेल्फ केयर से सेल्फ लव बिल्ड होने लगता है। अपनी पंसदीदा गतिविधियों को समय दें।

खुद को खुश रखने की चाभी आपके पास ही है चित्र : एडोबी स्टॉक

4. परिवार के साथ समय बिताएं

माता पिता से अपनी समस्याओं को शेयर करें और अधिकतर समय परिवार के सदस्यों के साथ बिताने का प्रयास करे। इससे जीवन में खुशियां बढ़ने लगती हैं। साथ ही व्यक्ति तनाव और एंग्जाइटी से भी दूर रहता है।

5. पूरी नींद लें

डॉ युवराज पंत बताते हैं कि रात में भरपूर नींद लेने से मन में बढ़ने वाली उत्तेजना को शांत करने में मदद मिलती है। इससे शरीर में हैप्पी हार्मोन सिक्रीट होने लगते हैं, जो शरीर को नर्वस ब्रेकडाउन से बचाने में मदद करते हैं। 8 से 10 घंटे की नींद लेना आवश्यक है।

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डिस्क्लेमर: हेल्थ शॉट्स पर, हम आपके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सटीक, भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद, वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति और चिंताओं के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।

लेखक के बारे में
ज्योति सोही

लंबे समय तक प्रिंट और टीवी के लिए काम कर चुकी ज्योति सोही अब डिजिटल कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। ब्यूटी, फूड्स, वेलनेस और रिलेशनशिप उनके पसंदीदा ज़ोनर हैं।

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