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बच्चे की ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है मां का मानसिक स्वास्थ्य, एक्सपर्ट से जानें कैसे

प्रेगनेंसी के दौरान और बाद, यहां तक की बच्चे के बड़े होने के बाद भी मां के मानसिक तनाव का असर बच्चे की सेहत पर देखने को मिल सकता है।
Updated On: 26 Feb 2024, 04:54 pm IST
बच्चों के हेल्दी ग्रोथ के लिए मां को रखना चाहिए अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान। चित्र : एडॉबीस्टॉक

मां और बच्चे की सेहत एक दूसरे से जुड़ी होती है। ये न केवल पेट में पल रहे बच्चे, बल्कि जन्म के बाद भी बच्चे की सेहत के लिए मां का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। खासकर मां का मानसिक स्वास्थ्य बच्चों की सेहत को फौरन प्रभावित करता है। प्रेगनेंसी के दौरान और बाद, यहां तक की बच्चे के बड़े होने के बाद भी मां के मानसिक तनाव का असर बच्चे की सेहत पर देखने को मिल सकता है। आज हम बात करेंगे बच्चों के डेवलपमेंट पर मां के मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव किस तरह नजर आ सकता है। तो चलिए बिना देर किए इस गंभीर विषय को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं (Mothers mental health and child development)।

इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हेल्थ शॉट्स ने मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स गुरुग्राम की कंसलटेंट साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मुनिया भट्टाचार्य से बात की। तो चलिए जानते हैं आखिर मां की सेहत बच्चे के विकास को किस तरह प्रभावित करती है।

जानें मां के मानसिक स्वास्थ्य का बच्चे की सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है (Mothers mental health and child development)।:

मां के मानसिक स्वास्थ्य का बच्चे के ग्रोथ पर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जो उनके भावनात्मक, सामाजिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है। शुरुआत में मां के मानसिक स्वास्थ्य का विकसित होने वाले भावनात्मक संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। यह महत्वपूर्ण रिश्ता मैटरनल स्ट्रेस, एंजायटी और डिप्रेशन से बाधित हो सकता है, जिसके दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं।

1. व्यवहार संबंधी समस्याएं

मानसिक तौर पर परेशान और पीड़ित महिलाओं के बच्चे अधिक तनावग्रस्त, भावनात्मक रूप से प्रतिक्रियाशील और व्यवहार संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं। एक मां के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे घर के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, जो बच्चे के ग्रोथ को प्रभावित करता है और सुरक्षा और विश्वास की भावना के लिए भी नकारात्मक रूप से सामने आता है।

बच्चे का ख्याल रखने के अलावा अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल भी रखें। चित्र : शटरस्टॉक

2. मां के देखभाल का तरीका प्रभावित हो सकता है

मां की लगातार देखभाल करने की क्षमता और उसकी पालन-पोषण शैली उसके मानसिक स्वास्थ्य से प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, अवसाद के परिणामस्वरूप प्रतिक्रियाशीलता में कमी आ सकती है, जो बच्चे की सामाजिक और भावनात्मक विकास की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। घर पर दी जाने वाली संज्ञानात्मक उत्तेजना के स्तर को प्रभावित करना संभव है, जो संज्ञानात्मक विकास के लिए आवश्यक होती है।

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3. लंबे समय तक रहता है प्रभाव

एक मां के मानसिक स्वास्थ्य और उनके बच्चे के ग्रोथ के बीच संबंध लंबे समय तक चल सकता है। बच्चे के सामान्य स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव की संभावना को कम करने के लिए, मां के मानसिक स्वास्थ्य के लिए शीघ्र देखभाल और सहायता आवश्यक है।

4. भावनात्मक जुड़ाव पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

मां की मानसिक स्थिति का अपने बच्चे के साथ उसके शुरुआती भावनात्मक लगाव पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। एक स्थिर लगाव मानसिक रूप से स्वस्थ मां द्वारा पोषित होता है, दूसरी ओर, मां में तनाव, चिंता या अवसाद इस महत्वपूर्ण बंधन को तोड़ सकता है और बच्चे की भावनात्मक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

5. प्रेगनेंसी के दौरान

मां और उसके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर प्राथमिक ध्यान गर्भावस्था के बाद के समय पर होता था। माता-पिता की एंजाइटी और डिप्रेशन नेगलेटफुल व्यवहार का कारण बन सकता है, जिससे भविष्य में बच्चे में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, हाल के एक रिसर्च से पता चलता है कि प्रेग्नेंट होने पर मां का मानसिक स्वास्थ्य उनके बच्चे को प्रभावित कर सकता है।

बच्चों के डेवलपमेंट पर मां के मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव किस तरह नजर आ सकता है। चित्र : एडॉबीस्टॉक

6. तनाव

जब बच्चे पेट में होते हैं, तो वे बार बार स्ट्रेस हार्मोंस के संपर्क में आते हैं, उनके मस्तिष्क में एमिगडाला होने की संभावना अधिक होती है। इसका मतलब है कि उनमें चिंता का स्तर अधिक होता है।

7. डिप्रेशन और एंजाइटी

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन द्वारा प्रकाशित अध्ययन के अनुसार एंजाइटी से पीड़ित महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान बच्चों की हार्ट बीट तब बढ़ जाती है, जब मां को कोई तनावपूर्ण कार्य दिया जाता है। एक अन्य अध्ययन में डिप्रेशन से पीड़ित गर्भवती माताओं के बच्चों में भावनाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के क्षेत्रों के बीच कम गतिविधि देखी गई।

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लेखक के बारे में
अंजलि कुमारी

पत्रकारिता में 3 साल से सक्रिय अंजलि महिलाओं में सेहत संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। हेल्थ शॉट्स के लेखों के माध्यम से वे सौन्दर्य, खान पान, मानसिक स्वास्थ्य सहित यौन शिक्षा प्रदान करने की एक छोटी सी कोशिश कर रही हैं।

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