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आप भी छोटी-छोटी बातों में अपना धैर्य खो देती हैं, तो एक्सपर्ट से जानें खुद को अधिक धैर्यवान कैसे बनाएं

अगर छोटी-छोटी परिस्थितियां में तनावग्रस्त या बैचेने महसूस करती हैं। तो ऐसे में आप में धैर्य कम होने की संभावना हो सकती है। खैर इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं, क्योंकि हमारे साथ एक्सपर्ट मौजूद हैं जो आपके धैर्य को बढ़ाने के लिए सुझाव शेयर करेंगे।
Updated On: 10 Dec 2020, 07:11 pm IST
एक्सपर्ट से जानें आप अधिक धैर्यवान कैसे बन सकती हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

क्या आप अक्सर सुपरमार्केट में शॉपिंग के दौरान लंबी लाइनों में मुठभेड़ का सामना करती हैं? क्या ट्रैफिक का शोर आपको नर्वस करता है। यह बहुत छोटे मुद्दे हैं, लेकिन क्या होगा यदि आपको अपने टेस्ट का रिजल्ट जानने के लिए एक सप्ताह इंतजार करना पड़े। क्या यह आपको बेचेन महसूस करा रहा है? अगर इन सभी प्रश्नों का उत्तर साकारात्मक है, तो ऐसे में यह अधिक संभावना है कि आप जल्दी ही अपना धैर्य खो देती हैं।

यह कहने की जरूरत नहीं है कि धैर्य सुनने में जितना आसान लगता है, लेकिन इसे बनाए रखना उतना ही कठिन है। कई बार ऐसा करना निश्चित रूप से आपके लिए कठिन हो सकता है। लेकिन अगर आप ज्यादातर स्थियों में परेशान या बेचेन महसूस कर रहीं हैं, तो महिलाओं इस पहलू पर काम करने का समय आ गया है।

जैसा कि मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार प्रीता गांगुली ने कहती हैं कि धैर्य को समझने के लिए, हमें पहले अधीरता (Impatience) को समझना चाहिए। अधीरता (Impatience) तब पैदा होती है जब हमारे पास एक लक्ष्य होता है जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं। हमारे पास एक विचार या अपेक्षा होती है कि यह कब और कैसे होगा, और अंततः किसी कारण से वे अपेक्षाओं को पूरा नहीं हो पा रही हैं। धैर्य इन परिवर्तनों और बाधाओं के साथ जुड़ा हुआ है।

त्वरित संतुष्टि (Instant gratification) नया आदर्श है, और हमें सब कुछ तेजी से और आसानी से प्राप्त करने की आदत है, जहां इस मुद्दे की जड़ निहित है। ईमेल और टेक्सट का जवाब देने से लेकर फास्ट-ट्रैक रिश्तों तक, एक दिन में डिलीवर और तत्काल फिल्म देखना। तकनीक में इन बदलावों के कारण धैर्य के साथ एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव आया है। हम सब कुछ परफेक्ट चाहते हैं, साथ ही अभी चाहते हैं। तो हम सब कुछ तत्तकाल (instant everything) की संस्कृति में धैर्य का अभ्यास कैसे करते हैं?

हमारा अर्थ आपको हतोत्साहित (discourage) करना नहीं है। लेकिन अधिक धैर्यवान बनने के लिए कुछ प्रयास करने होंगे, आखिरकार बिना कष्ट सहे कभी फल नहीं मिलता। स्थिति चाहे जो भी हो, एक्सपर्ट प्रीता गांगुली यहां स्थिति को बेहतर तरीके से निपटने में हमारी मदद करने के लिए मौजूद हैं। तो, क्या आप यह जानने के लिए तैयार हैं कि कैसे धैर्य रखें?

शांति और धैर्य बनाए रखने से आप अधिक खुशी महसूस करती हैं। चित्र: शटरस्टॉक

अपने लक्ष्य पर ध्यान दें

जब आप खुद को अधीर और बेचैन या विचलित होते हुए पाती हैं, तो ऐसे में अपने लक्ष्य को याद करें। खुद सवाल करें कि आप ऐसा क्यों कर रही हैं, और जब आप इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगी तो आपको कैसा लगेगा? यह अभ्यास हमारे ध्यान को भटकने नहीं देता है, साथ ही हमारे ध्यान को हमारे आस-पास की कई विकर्षणों (distractions) से स्थानातंरित करता है। यह हमें हमारे लक्ष्य के मूल्य का एहसास दिलाता है और हमें फिर से प्रेरित करता है।

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यहां तक कि अभी भी अगर आपको लगता है कि आप अपने फोकस खो रहीं हैं, तो भी चिंता न करें। शांत रहने की कोशिश करें, और अनुचित परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने के बजाए खुद को जवाब देने के लिए याद दिलाएं। अक्सर यह बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं जो आपको परेशान करती हैं, यह उन बाहरी परिस्थितियों के लिए आपकी प्रतिक्रिया है जो अधिक तनाव का कारण बनती हैं। तो, अनुभवों का बिल्कुल विरोध न करें, स्वीकृति का अभ्यास करें। यह आपको अपने लक्ष्य के करीब ले जाएगा।

आगे की योजना तैयार करें

अधीरता और व्याकुलता हमारे लिए कोई नई बात नहीं है। हम जानते हैं कि यह उत्पन्न होगा। पूरे फोकस के लिए अपने दिन या प्रोजेक्ट को इंटरपर्स (interspersing) करने के समय की योजना बनाएं और व्याकुलता के लिए कुछ समय ऐसी जगह बनाएं जहां आप अपना फोन दूर रख सकें। इसके अलावा, जब आप लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें, इसलिए क्योंकि आप विपत्तियों के लिए बेहतर तैयार हैं और उनके द्वारा निराश होने की संभावना कम है।

आगे की योजना तैयार करें कि आपको कैसे अपने धैर्य पर काबू पाना है। चित्र:शटरस्टॉक

सहानुभूति का अभ्यास करें

अक्सर हमारी अधीरता अन्य लोगों के व्यवहार से संबंधित होती है। कुछ समय लें और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण से सोचने की कोशिश करें। कि वह जिस तरह का व्यवहार कर रहें हैं उनकी अपनी परेशानी या कारण हो सकते हैं। इसलिए हमेशा सहानुभूति रखना और दयालु होना जरूरी है। जब हम सहानुभूति का अभ्यास करते हैं, तो हम अपने तनाव और निराशा को कम करते हैं, इससे हमें धैर्य रखने में आसानी होती है।

इंतजार करने की कोशिश करें

प्रतीक्षा करने के लिए रोजमर्रा के छोटे कार्यों में खुद को प्रशिक्षित करें। अगर आप एक चॉकलेट खाना चाहती हैं, तो शाम तक उसके लिए इंतजार करें। यदि आप कोई खेल खेलना चाहती हैं, तो तब तक इंतजार करें जब तक कि आप किसी अन्य कार्य को पूरा न कर लें। जब आप दोपहर का भोजन कर रही हों, तो आपने फोन को चेक करने के लिए भोजन के खत्म होने तक का इंतजार करें। यह छोटे छोटे स्टेप आपको धैर्यवान बनाने में बहुत मददगार साबित होते हैं।

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तो महिलाओं, खुद को धैर्यवान बनाने का समय आ गया है। कोशिश करें कि अपनी चीजों को यहां तक न पहुंचने दें। क्योंकि अगर आप धैर्य रखना चाहती हैं, तो आपको चीजों को लेकर धैर्य रखने की आवश्यकता होगी।

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