मलाइका से लेकर करण जोहर तक, बॉलीवुड में हर कोई पी रहा है ब्लैक वॉटर? जानिए क्या है यह नया ट्रेंड
हम में से अधिकांश अपने पसंदीदा सेलेब्स को अपनी फिटनेस इन्स्पिरेशन मानते हैं। इसलिए, जब से योगिनी मलाइका अरोड़ा को उनके योग सत्र के बाद ब्लैक वॉटर की बोतल के साथ देखा गया, तब से स्वास्थ्य और फिटनेस की दुनिया में हलचल मची हुई है! विराट कोहली, श्रुति हसन और करण जौहर जैसे सेलेब्स भी इसे लेते हैं।
लेकिन यह ब्लैक वॉटर है क्या और क्या यह वाकई फायदेमंद है? या यह एक और ट्रेंड है जो समय के साथ बीत जाएगा?
हेल्थशॉट्स ने इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए एक विशेषज्ञ से संपर्क किया। न्यूट्रिशनिस्ट और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर और डाइट एक्सप्रेशन की संस्थापक पारुल मल्होत्रा बहल का ब्लैक वॉटर के बारे में क्या कहना है।
“यह एक अल्कालाइन वॉटर है, जो फुल्विक एसिड की उपस्थिति के कारण काला प्रतीत होता है। काले पानी में ‘अल्कालाइन’ इसके पीएच स्तर को दर्शाता है। पीएच स्तर एक संख्या है जो मापता है कि 0 से 14 के पैमाने पर कोई पदार्थ कितना अम्लीय या क्षारीय है। उदाहरण के लिए, 1 के पीएच वाली सामग्री बहुत अम्लीय होगी और 13 के पीएच वाली सामग्री बहुत क्षारीय।
तो आखिर क्या है ये ब्लैक वॉटर ट्रेंड?
बहल बताती हैं कि नियमित पीने के पानी की तुलना में अल्कालाइन वॉटर का पीएच (8 से ऊपर) अधिक होता है। यही वजह है कि कई लोग मानते हैं कि यह आपके शरीर में एसिड को बेअसर करने में मदद कर सकता है।
वह कहती हैं “कई लोग यह भी मानते हैं कि यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मददगार है। आपके शरीर के पीएच स्तर को नियंत्रित करने और कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने में भी यह आपकी मदद कर सकता है। लेकिन इसे सत्यापित करने के लिए शायद ही कोई वैज्ञानिक प्रमाण है।”
इसलिए किसी भी चीज को अपने आहार में शामिल करने से पहले सावधानी बरतना भी जरूरी है। लेकिन क्या इसका कोई साइड इफेक्ट होता है?
तो यहां जानिए ब्लैक वॉटर के साइड इफैक्ट
भले ही ब्लैक वॉटर पीना काफी सुरक्षित है, लेकिन यह कुछ नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकता है। बहल कहती हैं – “यह आपके पेट के प्राकृतिक अम्लीय स्तर को कम कर सकता है, जो आपके पाचन को प्रभावित कर सकता है। और अगर अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है, तो यह गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे मतली, उल्टी, हाथ कांपना और मांसपेशियों में मरोड़ आदि का कारण बन सकता है।”
विशेषज्ञ की सलाह क्या है?
“मैं कहूंगी कि रेगुलर वॉटर को पूरी तरह से अल्कालाइन वॉटर से न बदलें। अगर किसी को कभी-कभी अल्कालाइन वॉटर चाहिए, तो प्राकृतिक अल्कालाइन पानी को प्राथमिकता दें। पानी जो स्वाभाविक रूप से अल्कालाइन होता है, वह चट्टानों से गुजरता है – जैसे झरनों का पानी, जो खनिजों को उठाता है और इसका अल्कालाइन स्तर बढ़ जाता है। जबकि बाजार में उपलब्ध काला पानी खनिजों से भरा हुआ है और आर्टीफिशियल है।”
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