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Myths about Lunar Eclipse : खाने में कुशा डाल देने से खाना शुद्ध हो जाता है, आइए तोड़ते हैं ग्रहण से जुड़े ऐसे ही 5 मिथ्स 

चंद्रग्रहण के बारे में बहुत सारे मिथ्स प्रचलित हैं। खासतौर से खानपान के बारे में। आइए एक एक्सपर्ट से बात करके जानें कि ये सही हैं या गलत। 
Updated On: 16 May 2022, 02:23 pm IST
चंद्रग्रहण के दौरान भोजन संबंधी कई मिथ्स हैं। चित्र: शटरस्टॉक

आज साल का पहला चंद्रगहण (Lunar Eclipse) लग चुका है। यह अंटार्कटिका, अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिण पश्चिम एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ भागों में दिखाई देगा। भारत में चंद्रग्रहण नहीं दिखाई देगा। मान्यता है कि चंद्रगहण का हमारे भोजन पर भी प्रभाव पड़ता है। पुराने जमाने से चंद्रगहण के समय भोजन को ढंक कर रख दिये जाने का चलन है। पके हुए भोजन पर कुश या हरी घास रख दी जाती है। चंद्रगहण केे दौरान खानपान को लेकर आजमाये जाने वाले नियम सिर्फ मिथ हैं या इनके पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य है (Myths and Facts about Food in Lunar Eclipse), यह जानने के लिए हमने बात की पटना के इंटेंस डाइट्स क्लिनिक के क्लिनिकल डाइटिशियन एंड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट सुधाकर मिश्रा से।

मिथ 1 : तेल-मसालेदार भोजन या मांसाहार का सेवन चंद्रग्रहण के दौरान नहीं करना चाहिए।

तथ्य: सुधाकर मिश्रा के अनुसार, चंद्रग्रहण का प्रभाव संपूर्ण पृथ्वी पर पड़ता है। इसके दौरान वायुमंडल और पृथ्वी, दोनों में बदलाव आते हैं। इससे कभी वातावरण अधिक गर्म, तो कभी ठंडक भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में में बॉडी टेम्प्रेचर को वातावरण के अनुकूल बनाने में समय लगता है। 

इसलिए तेल-मसालेदार भोजन या मांसाहारी भोजन, जो भारी भोजन भी कहलाता है, खाने से मना किया जाता है। तेल-मसालेदार भोजन या मांसाहार के सेवन से हमारा बॉडी टेम्प्रेचर भी बढ़ जाता है। इस तरह के फूड्स को पचाने में भी अधिक समय लगता है। इससे हमारा डायजेस्टिव सिस्टम प्रभावित हो सकता है और हमें डाइजेशन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए चंद्रग्रहण के दौरान दौरान हल्का खाना ही लेना चाहिए।

चंद्रग्रहण के दौरान नॉन वेज खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। चित्र : शटरस्टॉक

मिथ 2 : चंद्रगहण के दौरान खाना ढंक कर रखना चाहिए।

सामान्य तौर पर हम भोजन को हमेशा ढंक कर रखते हैं। ताकि भोजन में कोई मच्छर-मक्खी या किसी दूसरे तरह की गंदगी न चली जाए। चंद्रग्रहण के दौरान हानिकारक रेडिएशन होता रहता है। यदि चंद्रग्रहण लंबे समय तक लगा, तो भोजन को अवश्य ढंक कर रखना चाहिए। कम देर के लिए लगे हुए चंद्रग्रहण के दौरान भोजन पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ता है। भोजन यदि खुला रखा हुआ होगा, तो यह खराब हो सकता है। खराब भोजन से पेट में इंफेक्शन हो सकता है। कोलेरा, डिहाइड्रेशन की समस्या होे सकती है। इसलिए भोजन को ढंक कर रखना ऐसे भी एक हेल्दी आदत है। 

मिथ 3 : गर्भवती महिलाओं को लाइट डाइट लेनी चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

तथ्य: गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ बच्चों को भी लाइट डाइट देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। चंद्रग्रहण के दौरान निकलने वाला रेडिएशन न सिर्फ गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है, बल्कि टेम्प्रेचर हाई होने के कारण हैवी डाइट से प्रेगनेंट लेडी को अपच की समस्या हो सकती है। ठीक इसी तरह बच्चों को भी घर से बाहर नहीं निकलने दें और न ही उन्हें खाने के लिए हैवी जंक फूड, तले-भुने स्नैक्स या मसालेदार भोजन दें।

 मिथ 4 : ग्रहण के समय पानी न पिएं। बहुत अधिक प्यास लगी है, तो ढंका हुआ पानी या नारियल पानी पिएं।

तथ्य : ग्रहण के दौरान वातावरण में रेडिएशन के कारण कॉस्मिक परिवर्तन होते रहते हैं। इसलिए पानी में भी केमिकल रिएक्शन्स हो सकते हैं। ढंका पानी या नारियल पानी में इस तरह के रिएक्शन नहीं हो सकते हैं। इसलिए खुले में रखे पानी को एवॉयड करना चाहिए।

चंद्रग्रहण के दौरान नारियल पानी पिएं। चित्र : शटरस्टॉक

मिथ 5 : पके हुए भोजन पर घास या कुश रखने की सलाह दी जाती है।

फैक्ट:  यह भी माना जाता है कि चंद्रग्रहण के बाद भोजन पर गंगा जल छिड़कने से वह खाने लायक हो जाता है। इसके पीछे का तर्क सही नहीं है। घास या कुश रखने या से भोजन सुरक्षित नहीं हो पाता है। किसी भी शुद्धिकरण के तरीके से भोजन खाने लायक नहीं बन सकता है। यदि आपके शहर में लंबे समय तक चंद्रग्रहण रहा है, तो खुले में रखे भोजन को खाने में कोई समझदारी नहीं है।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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