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Autistic Pride Day : उन बच्चों के लिए खास दिन, जिन्हें हम सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान की जरूरत है

ऑटिस्टिक प्राइड डे पूरी दुनिया में 18 जून को मनाया जाने वाला एक ऐसा दिवस है, जब लोगों को ऐसे बच्चों के लिए जागरूक किया जाता है जो मानसिक तौर पर औरों से अलग हैं।
Updated On: 15 Nov 2023, 12:33 pm IST
हमें उनके प्रति और सहज होने की जरूरत है। चित्र : शटरस्टॉक

कभी आपने अपने आसपास ऐसे बच्चे देखे होंगे जो मानसिक और शारीरिक रूप से उतने बेहतर नहीं होते, जितना अन्य बच्चे। ऐसे बच्चे वो होते हैं जो ऑटिज्म डिसॉर्डर की चपेट में आ जाते हैं। भारत में लगभग एक करोड़ ऐसे बच्चे हैं, जो इस डिसॉर्डर की चपेट में हैं। ऐसे बच्चों के प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार और लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से हर साल 18 जून को ऑटिस्टिक प्राइड डे (Autistic Pride Day) के तौर पर मनाया जाता है।

सबसे पहले समझें क्या होता है ऑटिज्म?

ऑटिज्म एक ऐसी दिमागी बीमारी है, जिससे ग्रस्त लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की परेशानियां होती हैं। ये एक ऐसा डिसॉर्डर है, जिससे बच्चे में आत्म विश्वास की कमी हो जाती है और बच्चा हमेशा डरा सहमा सा महसूस करता है।

जैसे आपने बर्फी फिल्म में प्रियंका चौपड़ा को देखा होगा।ऑटिज्म जन्म के समय या उसके शीघ्र बाद शुरू होनेवाली जीवन-भर की विकलांगता है। ये व्यक्ति के सीखने के ढंग और उसके काम करने कि स्थिति पर प्रभाव डालती है।

ऑटिस्टिक प्राइड डे

मानसिक अक्षमता बहुत सारी समस्याओं का कारण बनती है। खासतौर से ऑटिज्म में बच्चे उन छोटी-छोटी चीजों को सीखने में भी चुनौतियों का सामना करते हैं, जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। इनकी निर्भरता कभी-कभी परिवार और इनके आसपास के लोगों में खीझ पैदा करती है। परंतु प्रकति का सिद्धांत है कि हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है। यही सबसे जरूरी मानवाधिकार भी है। इन बच्चों के सम्मान के प्रति शेष दुनिया को जागरुक करने के लिए हर वर्ष 18 जून को ऑटिस्टिक प्राइड डे मनाया जाता है।

वहीं हर साल इसके लिए एक थीम निश्चित की जाती है। महामारी ने जब सभी के लिए चुनौतियां बढ़ाई हैं, वहीं ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के लिए मुश्किलें और बढ़ीं हैं। इसलिए इस वर्ष की थीम Inclusion in the Workplace: Challenges and Opportunities in a Post-Pandemic World’ रखी गई है।

सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, वर्तमान समय में संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 59 बच्चों में से अनुमानित 1 बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है। वहीं विशेषज्ञों की मानें तो भारत में 100 में से 1 बच्चा इसका शिकार है।

ये एक ऐसा डिसॉर्डर है, जिससे बच्चे में आत्म विश्वास की कमी हो जाती है, चित्र शटरस्‍टॉक

शुरुआत में ही दिखने लगते हैं इसके लक्षण

ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 1-3 साल के बच्चों में नजर आ जाते हैं। जो कुछ इस प्रकार हो सकते हैं जैसे-

• बच्चे का बहुत कम चीज़ों में रूचि लेना और एक ही तरह के काम को बार-बार करना।
• दूसरे बच्चों के मुक़ाबले सीखने और खेल-कूद में कम भाग लेना।
• भाषा और बातचीत करने की कला के विकास में भिन्नता।
• तेज़ ध्वनियों से बच कर रहना या इधर-उधर ज़्यादा चलना-फिरना।

ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों में कुछ लक्षण समान और कुछ भिन्न भी हो सकते हैं। जिस कारण इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम भी कहते हैं।

बच्चे में ऑटिज्म से पीड़ित होने के ये हो सकते हैं कारण

इस पर अभी तक कोई सही जानकारी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसके कई कारण माने गए हैं, जिससे इस बीमारी के होने का पता लगाया जा सके।

गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन की कमी। चित्र: शटरस्‍टॉक
  • प्रेगनेंसी के दौरान पर्यावरणमें मौजूद रसायनों से होने वाला संक्रमण। जो नर्वस सिस्टम पर गहरा असर करता है।
  • गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में थायरॉइड हॉर्मोन की कमी
  • शिशु का तय समय से पहले जन्म लेना।
  • डिलीवरी के समय शिशु को सही मात्रा में ऑक्सीजन न मिलना।
  • गर्भावस्था में मां का किसी बीमारी से ग्रस्त होना।
  • गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्वों की कमी।

क्या इसका उपचार संभव है

अभी तक इसके लिए ऐसी कोई दवा नहीं बनी है, जो इसका उपचार कर सकें। परंतु इसके लक्षणों का उपचार किया जा सकता है। जैसे नींद न आना, भूख न लगना। इसमें बच्चे को व्यवहारिक थेरेपी भी दी जा सकती है, जिससे उसके लिए अपने दैनिक कार्यों को सीखना आसान हो सके। बस जरूरत है बहुत सारे प्यार और धैर्य की। ताकि परिवार के अन्य सदस्यों की मदद और सहयोग से उनके जीवन को थोड़ा और सम्मानजनक बनाया जा सके।

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लेखक के बारे में
अंबिका किमोठी

योगा, डांस और लेखनी, यही सफर के साथी हैं। अपनी रचनात्‍मकता में देखूं कि ये दुनिया और कितनी प्‍यारी हो सकती है।

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