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डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन की ओवरडोज बढ़ा सकती है कैंसर का खतरा, जानिए कैसे

डायबिटीज अपने साथ कई और बीमारियों का जोखिम लेकर आती है। कैंसर भी इन्हीं में से एक है। अगर आपका शुगर लेवल बढ़ रहा है, तो आपको इस स्टडी पर ध्यान देना चाहिए।
Updated On: 20 Oct 2023, 09:18 am IST
ग्लूकोज के सामान्य स्तर को बनाए रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। चित्र शटरस्टॉक।

जेएएमए ऑन्कोलॉजी (JAMA Oncology) द्वारा प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इंसुलिन की हाई डोज कैंसर जैसी गंभीर समस्या को जन्म दे सकती है। स्टडी इंसुलिन की हाई डोज और टाइप 1 डायबिटीज के मरीजो को कैंसर होने की संभावना पर फोकस कर रही है। वहीं हाई ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन का बढ़ता लेवल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि टाइप 2 डायबिटीज, किडनी फैलियर, फैटी लिवर, कार्डियो वैस्कुलर डिजीज और कैंसर होने के जोखिम बढ़ा देता है।

स्टडी में बताया गया है कि कैंसर होने की संभावना एज और जेंडर पर भी निर्भर करती है। इंसुलिन की हाई डोज बढ़ती उम्र के साथ कैंसर होने की संभावना को भी बढ़ा देती है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर होने की संभावना कई गुणा ज्यादा नजर आई।

पहले जानें इंसुलिन है क्या

इंसुलिन पैंक्रियाज द्वारा रिलीज किए जाने वाला एक प्रकार का हार्मोन है। जब आप किसी भी खाद्य पदार्थ के माध्यम से शुगर कन्ज्यूम करती हैं, तो यह पैंक्रियाज को इंसुलिन रिलीज करने के लिए ट्रिगर करता है। फिर इंसुलिन शुगर को एनर्जी में कन्वर्ट करके ब्लड सेल्स तक पहुंचाने का काम करती है। इसके साथ ही इंसुलिन शरीर में लिपिड और फैट को ब्रेकडाउन करने और इसे इस्तेमाल करने में मदद करती है।

मधुमेह को नियंत्रित रखती है इन्सुलिन। चित्र : शटरस्टॉक

शरीर में इंसुलिन की मात्रा पूरी तरह आपके शुगर इनटेक पर निर्भर करती है। यदि आप अधिक मात्रा में शुगर लेती हैं, तो पैंक्रियाज ज्यादा मात्रा में इंसुलिन रिलीज करते हैं। वहीं मोटापे से ग्रसित व्यक्ति में इन्सुलिन रेजिस्टेंस होने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या है इंसुलिन रेजिस्टेंस कैंसर का कनैक्शन

ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन की हाई डोज लेना इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में मसल्स सेल्स, फैट और लिवर इंसुलिन को रिस्पांस नहीं करते। साथ ही इंसुलिन शुगर और ग्लूकोज को एनर्जी में कन्वर्ट नहीं कर पाता। जिस वजह से ब्लड शुगर लेवल काफी ज्यादा बढ़ सकता है।

इंसुलिन के ओवरडोज से वेस्ट और ऑर्गन्स के पास एक्स्ट्रा फैट जमा होने लगता है। परिणाम स्वरूप वजन बढ़ने, इन्फ्लेमेशन और हार्मोन अवरोध के कारण विभिन्न प्रकार के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

डाइबिटीज के मरीजों को बना रहता है कैंसर का खतरा। चित्र शटरस्टॉक।

स्टडी में बताया गया है कि इंसुलिन के ओवरडोज से डायबिटीज के मरीजों में कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में ज्यादातर पेट, लिवर, पेनक्रियाज, एंडोमेट्रियम और किडनी कैंसर देखने को मिला।

दूसरी ओर एक स्टडी में बताया गया कि लंबे समय तक इंसुलिन का लेवल बढ़ा रहने से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। कई और स्टडीज में यह भी सामने आया है कि लाइफ़स्टाइल हैबिट्स में बदलाव लाकर अर्थात स्वस्थ खानपान की आदत, ज्यादा से ज्यादा समय एक्टिव रहना और एक हेल्दी वेट मेंटेन करके इन तीनों प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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लेखक के बारे में
अंजलि कुमारी

पत्रकारिता में 3 साल से सक्रिय अंजलि महिलाओं में सेहत संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। हेल्थ शॉट्स के लेखों के माध्यम से वे सौन्दर्य, खान पान, मानसिक स्वास्थ्य सहित यौन शिक्षा प्रदान करने की एक छोटी सी कोशिश कर रही हैं।

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