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फ्लैट फुट के कारण जल्दी थका देती हैं फिजिकल एक्टिविटी, तो इन 4 एक्सरसाइज से करें इससे डील

हम सभी के हाथ, पैर और शरीर के अन्य अंग अलग-अलग दिखते हैं। मगर कुछ कॉमन फीचर्स के आधार पर हम इन्हें सामान्य मानते हैं। मगर कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं, जो शरीर के एक खास किस्म के आकार के कारण चुनौतियां बढ़ा देती हैं। फ्लैट फुट ऐसी ही एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है।
Updated On: 8 Oct 2024, 05:25 pm IST
फ्लैटफुट के कारण हो सकता है आपके पंजों में दर्द। चित्र- अडोबीस्टाॅक

अंदर क्या है

  • क्या है फ्लैट फुट?
  • फ्लैट फुट के प्रकार 
  • फ्लैट फुट के कारण
  • फ्लैट फुट की चुनोतियां
  • फ्लैट फुट से डील करने के लिए एक्सरसाइज

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके पैरों का आर्च आपके जीवन को कितना प्रभावित कर सकता है? फ्लैट फीट, जिसे हम सामान्यतः अनदेखा कर देते हैं, वास्तव में एक ऐसी स्थिति है जो न केवल चलने में कठिनाई पैदा कर सकती है, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। आज हेल्थ शॉट्स में हम जानेंगे कि क्याें कुछ लोगों के पैर समतल या फ्लैट फीट (Causes of flat feet) होते हैं। इसके कारणों के बारे में जानने के साथ ही हम एक्सपर्ट से बात करेंगे इसमें मददगार कुछ एक्सरसाइज (Exercises for flat feet) के बारे में।

क्या है फ्लैट फुट? (What is flat foot)

इस बारे में नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में कंसल्टेंट – ऑर्थोपेडिक्स, डॉ. हेमंत बंसल, बताते है कि फ्लैट फ़ुट यानी समतल पैर एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक या दोनों पैरों का आर्च या गोलाकार ऊपरी हिस्सा बिल्कुल नहीं होता है। इससे पैरों का पूरा तल जमीन को छूता है, जो चलने और खड़े होने में समस्या पैदा कर सकता है।

जब गीले पांव जमीन पर चलते हैं तो पांव के मार्क आधे ही नीचे छपते हैं. लेकिन, फ्लैट फुट वाले लोगों के फुट मार्क पूरी तरह जमीन पर बन जाते हैं। सभी बच्चे जन्म के समय फ्लैट फीट के साथ होते हैं। आमतौर पर, 6 वर्ष की आयु तक आर्च विकसित हो जाती है। लगभग 20% बच्चे वयस्क होने पर भी फ्लैट फीट के साथ रहते हैं। कुछ वयस्कों में आर्च ढह जाती है, जिसे “फॉलन आर्च” भी कहा जाता है।

फ्लैट फीट अधिकांश लोगों के लिए गंभीर समस्या नहीं होती। यदि फ्लैट फीट से दर्द या अन्य समस्याएँ होती हैं, तो उपचार भी उपलब्ध हैं।

4 तरह के हो सकते हैं फ्लैट फुट (Types of flat feet)

फ्लैट फीट की समस्याएँ बचपन के बाद भी बनी रह सकती हैं या वयस्कता में विकसित हो सकती हैं। फ्लैटफुट के प्रकार में शामिल हैं:

फ्लैट फुट होने पर आप किसी भी फिजिकल एक्टिविटी में जल्दी थक जाते हैं। चित्र: शटरस्टॉक

1. फ्लेक्सिबल फ्लैट फीट:

यह सबसे सामान्य प्रकार है। जब आप खड़े नहीं होते हैं, तो आर्च दिखती है, लेकिन जब वजन डालते हैं, तो आर्च गायब हो जाती है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है।

2. रिजिड फ्लैट फीट:

इसमें खड़े या बैठे रहने पर पैरों में कोई आर्च नहीं होती। यह किशोरावस्था में विकसित होती है और उम्र के साथ खराब होती है। पैरों में दर्द और गति में कठिनाई हो सकती है।

3. एडल्ट-एक्वायर्ड फ्लैट फीट (फॉलन आर्च):

इस स्थिति में अचानक आर्च गिर जाती है। यह आमतौर पर एक पैर को प्रभावित करती है और दर्दनाक हो सकती है।

4. वर्टिकल टालस:

कुछ बच्चों में जन्मजात विकार होता है जो आर्च के विकास को रोकता है। इसमें टालस हड्डी गलत जगह में होती है।”

क्या हैं फ्लैट फुट के कारण (Causes of flat feet)

डाॅ बंसल आगे कहते हैं कि “यदि इसके कारणों की बात की जाए तो ये जन्मजात भी हो सकता है यानी यह जन्म से ही हो सकता है। फ्लैट फीट का होना जेनेटिक कारण से हो सकता है। इसके अलावा, उम्र बढ़ने, चोट लगने, हड्डियों के टूटने, मोटापे, या अत्यधिक चलने-फिरने से भी यह समस्या हो सकती है।

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कुछ मामलों में, डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और रुमेटीइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी समतल पैर का कारण बन सकती हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, आर्च बनती हैं। कुछ लोगों में बड़े होने के बाद पैरों में फ्लैट फीट की समस्या बनती है।”

फ्लैट फुट के साथ हो सकती हैं ये समस्याएं (Challenges with flat feet)

इसके लक्षणों को समझाते हुए डाॅ. बंसल बताते हैं कि “कई लोग फ्लैट फुट के साथ दर्द का अनुभव नहीं करते हैं। लेकिन कुछ प्रकार के फ्लैटफुट दर्दनाक हो सकते हैं। इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

• पैर की मांसपेशियों का दर्द
• आर्च, एंकल, हील या पैरों के बाहर दर्द
• चलने में कठिनाई
• गति का धीमा होना
• अंगूठों का बाहर की ओर मुड़ना
• पंजों में सूजन
कमर या रीढ़ की हड्डी में दर्द
• पंजों में अकड़न या भारीपन

समतल पैर की स्थिति वाले लोगों को अक्सर पैर, टखने, घुटने और कमर में दर्द की शिकायत होती है, क्योंकि शरीर का भार सही तरीके से बंट नही पाता है। इससे चलते समय संतुलन खराब हो सकता है और पैर में थकान जल्दी हो जाती है। लंबे समय तक इस स्थिति को अनदेखा करने से घुटने और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे आगे चलकर आर्थराइटिस या अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

गाॅल्फ बाॅल रोल एक्सरसाइज हो सकती है मददगार।चित्र- अडोबीस्टाॅक

क्या फ्लैट फुट को ठीक किया जा सकता है? (Exercises to deal with flat feet)

ऐसे में इस समस्या के उपचार के लिए आपको विशेष जूते या इनसोल का उपयोग, फिजियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने के व्यायाम अपनाने चाहिए। जैसे

1. एंकल कोर्ड स्ट्रेचिंग (ankle cord stretching)

  1. एक दीवार के सामने खड़े हों और एक हाथ को दीवार पर आंखों के स्तर पर रखें।
  2. जिस पैर को खींचना है, उसे दूसरे पैर के लगभग एक कदम पीछे रखें और एड़ी को मजबूती से जमीन पर रखें।
  3. आगे के पैर के घुटने को मोड़ें जब तक आपको पीछे के पैर में खिंचाव महसूस न हो।
  4. 30 सेकंड तक इस स्थिति को बनाए रखें, फिर 30 सेकंड आराम करें।
  5. इसे 9 बार और दोहराएँ। पीठ को झुकाने से बचें और इसे सीधा रखें।

इस व्यायाम को दिन में दो बार करें।

2. गोल्फ़ बॉल रोल (Golf Ball roll)

  1. इस के लिए एक कुर्सी और एक गोल्फ़ बॉल की आवश्यकता है। यह पैरों की मांसपेशियों को लचीला बनाने में मदद करेगा।
  2. कुर्सी पर बैठें और पैरों को जमीन पर मजबूती से रखें।
  3. गोल्फ़ बॉल को पैर के नीचे रखें और इसे 2 मिनट तक पैर के आर्च के नीचे आगे-पीछे रोल करें ताकि प्लांटर फेशिया लिगामेंट खींच सके।

3. काल्फ रेज़ (Calf raise)

  1. सीधे खड़े हों और पैरों को कंधे की चौड़ाई के स्तर पर रखें।
  2. धीरे धीरे एड़ियों को सांस भरते हूए ऊपर उठाएं और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए नीचे लाएँ।
  3. इस प्रक्रिया को 10-15 बार दोहराएं।

गंभीर मामलों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी दे सकते हैं। आपका ऑर्थोपेडिक सर्जन आपके पैरों में आर्च बना सकता है, टेंडन की मरम्मत कर सकता है, या आपकी हड्डियों या जोड़ों को जोड़ सकता है। यह समस्या होने पर आपको तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।”

यह भी देखें: – swelling feet during pregnancy : मुहावरा नहीं, वास्तव में समस्या है पैर भारी होना, एक्सपर्ट बता रही हैं राहत पाने के 6 उपाय

डिस्क्लेमर: हेल्थ शॉट्स पर, हम आपके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सटीक, भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद, वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति और चिंताओं के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।

लेखक के बारे में
जान्हवी शुक्ला

कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट जान्हवी शुक्ला जर्नलिज्म में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हैं। लाइफस्टाइल, फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस उनके लेखन के प्रिय विषय हैं। किताबें पढ़ना उनका शौक है जो व्यक्ति को हर दिन कुछ नया सिखाकर जीवन में आगे बढ़ने और बेहतर इंसान बनाने में मदद करती हैं।

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