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टाइट हिप्स और स्टिफनेस से छुटकारा पाना है, तो इन 3 एक्सरसाइज का करें अभ्यास

आपके भी कूल्हे हो गाए है कठोर और टाइट तो उन्हे खोलने के लिए करें ये व्यायाम
Published On: 14 Mar 2024, 08:00 am IST
इनपुट फ्राॅम
कूल्हे के फ्लेक्सर्स, आपके चलने के तरीके में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चित्र- अडोबी स्टॉक

हमारे कूल्हे कितना दिन कितना तनाव और परेशानी झेलते हैं, इसका अंदाजा हमें तब तक नहीं होता, जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती। जब तक आप अपने शरीर के इस हिस्से को हिलाएंगे नहीं या उस पर काम नहीं करेंगे, तब तक समस्या कम होने वाली नहीं है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने के कारण हिप्स का तनाव और स्टिफनेस बढ़ने लगती है। जिससे वे चौड़ और बेडौल भी हो सकती हैं। अगर आप भी हिप्स का तनाव कम कर लचीलापन बढ़ाना चाहती हैं, तो इन एक्सरसाइज को अपने वर्कआउट रुटीन में जरूर शामिल करें।

फिटनेस और वेलनेस एक्सपर्ट यश अग्रवाल बताते हैं कि आपके कूल्हे के फ्लेक्सर्स, यानी आपके कूल्हे की हड्डियों के ठीक नीचे की मांसपेशियां, आपके चलने के तरीके में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस मांसपेशी समूह में इलियोपोसा, रेक्टस फेमोरिस और सार्टोरियस शामिल हैं। घुटनों को ऊपर उठाना और कमर को झुकाना, चलना, दौड़ना और बैठने की स्थिति से लेकर खड़े होना तक सारी जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। इसलिए इन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

तितली आसन शरीर के निचले भाग को मजबूती देता है चित्र : एडोबी स्टॉक

क्यों टाइट और स्टिप होने लगते हैं हिप्स (Causes of tight hips)

1 सेडेंटरी लाइफस्टाइल

काम के सिलसिले में लंबे समय तक बैठे रहना हम सभी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। जिससे कूल्हे के फ्लेक्सर्स छोटे और कड़े हो जाते हैं। इससे ये मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे समय के साथ उनका लचीलापन कम हो जाता है।

2 स्ट्रेचिंग न करना

यदि आप केवल बैठे रहते है और कोई भी एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग नहीं करते है तो कूल्हे में लचीलेपन धीरे धीरे कम हो जाता है। स्ट्रेचिंग हिप फ्लेक्सर्स और आसपास की मांसपेशियों को लचीला बनाती है।

3 भावनात्मक तनाव के कारण

योग और समग्र स्वास्थ्य क्षेत्रों इस बात को माना जाता है कि इमोशनल स्ट्रेस आपके शरीर में फिजिकल रूप में भी जमा होता है। कूल्हों को अक्सर भावनात्मक तनाव का भंडारण क्षेत्र माना जाता है जो इसके टाइट होने का कारण बनता है।

4 उम्र के साथ होने वाले बदलाव

हड्डियों में जीवित टिशू होते हैं, और जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हड्डियों और जोड़ों में स्वाभाविक रूप से कुछ लचीलापन कम हो जाता है, जिससे ये कठोर हो जाते है।

इन हिप ओपनिंग स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से कर सकती हैं शुरुआत

1 बद्ध कोणासन (Butterfly Stretch)

यह हल्का स्ट्रेच होता है जो जांघों को अंदर की तरफ से , कमर और कूल्हों को खोलता है, लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करता है और निचले शरीर में जकड़न को कम करता है।

इसे कैसे करना है

सबसे पहले फर्श पर बैठ जाएं।

अपने पैरों के तलवों को एक साथ लेकर आएं।

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घुटने बगल की ओर मुड़े हों।

अपने पैरों को हाथों से पकड़ें और धीरे से अपने घुटनों को फर्श की ओर प्रेस करें।

अधिक स्ट्रेच आने के लिए थोड़ा आगे की ओर झुकें।


ये स्ट्रेच बहुत आरामदायक है जिसे आप आराम से बिस्तर पर कर सकते है।
चित्र: शटरस्टॉक

2 गोडेस स्ट्रेच (Nighttime Goddess Stretch)

ये स्ट्रेच बहुत आरामदायक है जिसे आप आराम से बिस्तर पर कर सकते है, जिससे आपको आराम करने और बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

इसे कैसे करना है

घुटनों को मोड़कर पीठ के बल लेटें।

अपने पैरों के तलवों को एक साथ लाकर जोड़ लें।

अपने घुटनों को खुला रहने दें, जिससे आपके पैरों का आकार डाइमेंड जैसा हो जाए।

अपने घुटनों को धीरे से ज़मीन की ओर धकेलने के लिए अपने हाथों का उपयोग करें।

यदि आपको कोई तनाव महसूस हो, तो प्रत्येक घुटने के नीचे एक तकिया रखकर इसे करें।

लिजर्ड पोज हिप फ्लेक्सर्स और क्वाड्रिसेप्स में काफी गहराई से स्ट्रेच करता है। चित्र- अडोबी स्टॉक

3 उत्थान प्रतिष्ठासन (Lizard Pose)

लिजर्ड पोज हिप फ्लेक्सर्स और क्वाड्रिसेप्स में काफी गहराई से स्ट्रेच करता है, जिससे पेल्विक क्षेत्र में लचीलापन और ताकत बढ़ती है।

इसे कैसे करना है

सबसे पहले प्लैंक स्थिति में आ जाएं, अपने शरीर को एक सीधी रेखा में रखें।

अपने दाहिने घुटने को आगे लाएं। आपका दाहिना टखना आपकी बायीं कलाई के पास होना चाहिए।

अपने बाएं पैर को अपने पीछे सीधा करें। अपने कूल्हों को अपनी चटाई के सामने चौकोर रखें।

अपने दाहिने कूल्हे और ग्लूट में स्ट्रेच महसूस करें, गहरे स्ट्रेच के लिए अपने ऊपरी शरीर को अपने सामने के पैर के ऊपर मोड़ सकते हैं।

इसे बाद अपने बाएं पैर को आगे लाकर इसे दोहराएं।

डिस्क्लेमर: हेल्थ शॉट्स पर, हम आपके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सटीक, भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद, वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति और चिंताओं के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।

लेखक के बारे में
संध्या सिंह

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं।

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