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उम्र से पहले बूढ़ी नहीं होना चाहतीं, तो इन बुरी आदतों से बचना है जरूरी

आपकी स्किन को लंबे समय तक जवां रहने के लिए कोलेजन की जरूरत होती है। लेकिन आपकी ऐसी कई आदते हैं, जो आपके शरीर में कोलेजन के उत्पादन को कम कर सकती हैं और आप उम्र से पहले बूढ़ी दिखने लगती हैं।
Published On: 19 Jun 2023, 08:19 pm IST
कोलेजन फाइबर की मदद से स्किन के लिए इलास्टिन और हायलूरोनिक एसिड की प्राप्ति होती है। इससे त्वचा की नमी और लोच बरकरार रहती है। चित्र- अडोबी स्टॉक

उम्र बढ़ने के साथ ही धीरे-धीरे कोलेजन का उत्पादन कम होने लगता है। जिसकी वजह से स्किन पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और त्वचा लटकने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। वास्तव में कोलेजन का अच्छा उत्पादन आपकी स्किन के लिए जरूरी है। यही आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवां बनाए रखता है। पर आज कल हमने अपने लाइफस्टाइल में बहुत सी ऐसी बुरी आदतों को शामिल कर लिया है, जिनकी वजह से कोलेजन का उत्पादन प्रभावित होता है।

हम सभी जानत है कि सूरज से निकलने वाली यूवी रेज आपकी स्किन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। इसलिए जो लोग एसपीएफ का इस्तेमाल करते हैं, और जो नहीं करते हैं, उनकी स्किन में काफी अंतर दिखता है। पर सिर्फ यही एक कारण नहीं हैं। यूवी रेज के अलावा भी 3 कारण हैं, जो कोलेजन प्रोडक्शन को रोक कर आपकी स्किन को बूढ़ा बनाते हैं।

समझिए क्या होता है कोलेजन

कोलेजन एक प्रोटीन है जो हमारे कनेक्टिव टिशू का एक प्रमुख घटक है। यह हमारी त्वचा, हड्डियों, टेंडन, लिगामेंट्स और शरीर में अन्य संरचनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। उम्र के हिसाब से कोलेजन का उत्पादन स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है। जो उम्र बढ़ने के संकेतों में योगदान कर सकता है।

सूरज से निकलने वाली यूवी रेज आपकी स्किन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। चित्र : एडॉबीस्टौक

झुर्रियां, जोड़ों की जकड़न और त्वचा की इलास्टिसिटी में कमी आना संकेत है कि काेलेजन का प्राेडक्शन धीमा होने लगा है। इसने कोलेजन के सप्लीमेंट, क्रीम और अन्य उत्पादों की लोकप्रियता को बढ़ावा दिया है जिसका उद्देश्य कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देना और स्वस्थ त्वचा और शरीर के स्वास्थ्य का समर्थन करना है।

इन कारणों से कम होने लगता है कोलेजन प्रोडक्शन

1 स्मोकिंग करना (smoking)

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसन के अनुसार धूम्रपान शरीर में कोलेजन उत्पादन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। सिगरेट के धुएं में हानिकारक रसायन, जैसे निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड, कोलेजन के बनने को बाधित करते हैं और कोलेजन के कम होने को बढ़ावा देते हैं।

निकोटिन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, रक्त प्रवाह और त्वचा और ऊतकों में पोषण को कम करता है जो कोलेजन उत्पादन के लिए आवश्यक है। कार्बन मोनोऑक्साइड ऑक्सीजन की उपलब्धता को कम करता है। धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव और मुक्त कण भी उत्पन्न करता है, जो कोलेजन फाइबर को नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान छोड़ने से कोलेजन उत्पादन और समग्र त्वचा स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे ठीक हो सकता है।

2 बेवजह तनाव लेना (Stress)

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन रिलीज होते है। ऊंचा कोर्टिसोल स्तर कोलेजन के उत्पादन में हस्तक्षेप कर सकता है और कोलेजन टूटने की वजह बन सकता है।

कोर्टिसोल कोलेजन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं, फाइब्रोब्लास्ट्स की गतिविधि को बधित करके कोलेजन के उत्पादन को रोकता है। इससे कोलेजन का स्तर कम हो सकता है और ऊतक की मरम्मत में कमी आ सकती है।

तनाव कोलेजन का क्रॉस-लिंकिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। अत्यधिक तनाव से क्रॉस-लिंकिंग एंजाइमों में असंतुलन हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप कोलेजन संरचना असामान्य हो जाती है और लोच कम हो जाती है।

त्वचा की खूबसूरती को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए शरीर में कोलेजन की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। चित्र शटरस्टॉक।

3 इंफ्लेमेशन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ (Inflammation diet)

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शक्करयुक्त स्नैक्स और अस्वास्थ्यकर वसा वाले आहार पोषक तत्वों के असंतुलन का कारण बन सकते हैं। कोलेजन उत्पादन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से विटामिन और खनिजों में, प्रभावी रूप से कोलेजन का उत्पादन करने की शरीर की क्षमता में बाधा डाल सकती है।

इंफ्लामेंटरी आहार ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं, जो तब होता है जब मुक्त कणों के उत्पादन और उन्हें बेअसर करने की शरीर की क्षमता के बीच असंतुलन होता है। मुक्त कण कोलेजन फाइबर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कोलेजन उत्पादन को बाधित कर सकते हैं।

4 देर रात तक जागना (Sleeping)

नींद के दौरान, शरीर क्षतिग्रस्त कोलेजन फाइबर की मरम्मत और पुनर्जनन की प्रक्रिया होती है। पर्याप्त नींद शरीर को नए कोलेजन के उत्पादन सहित ऊतकों की मरम्मत और पुनर्स्थापित करने में मदद करती है।

नींद एक स्वस्थ हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, जिसमें कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का नियंत्रण शामिल है। कोर्टिसोल का ऊंचे स्तर, अक्सर खराब नींद की गुणवत्ता के कारण होता है, जो कोलेजन के उत्पादन और कोलेजन के टूटने का कारण बनते है।

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लेखक के बारे में
संध्या सिंह

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं।

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